रविवार, 15 फ़रवरी 2026

Shishupal

 

शिशुपाल

शिशुपाल महाभारत काल का एक प्रसिद्ध और शक्तिशाली राजा था। वह चेदि देश का शासक और भगवान श्रीकृष्ण का ममेरा भाई था। अपने अहंकार, क्रोध और श्रीकृष्ण से शत्रुता के कारण वह विशेष रूप से जाना जाता है।

जन्म और परिवार

शिशुपाल का जन्म चेदि नरेश दमघोष और रानी श्रुतश्रवा के यहाँ हुआ था। श्रुतश्रवा, वसुदेव (श्रीकृष्ण के पिता) की बहन थीं, इसलिए शिशुपाल और श्रीकृष्ण आपस में रिश्तेदार थे।

कहते हैं कि जन्म के समय शिशुपाल के तीन नेत्र और चार भुजाएँ थीं। आकाशवाणी हुई कि जिस व्यक्ति की गोद में जाते ही उसकी अतिरिक्त भुजाएँ और नेत्र गायब हो जाएँगे, वही आगे चलकर उसका वध करेगा। जब बालक को श्रीकृष्ण की गोद में रखा गया, तो उसके अतिरिक्त अंग सामान्य हो गए। यह देखकर उसकी माता ने श्रीकृष्ण से वचन लिया कि वे उसके सौ अपराधों तक उसे क्षमा करेंगे।

श्रीकृष्ण से शत्रुता

शिशुपाल बचपन से ही श्रीकृष्ण से ईर्ष्या करता था। विशेष रूप से जब श्रीकृष्ण ने विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी का हरण कर उनसे विवाह किया, तब शिशुपाल अत्यंत क्रोधित हो गया, क्योंकि वह स्वयं रुक्मिणी से विवाह करना चाहता था।

राजसूय यज्ञ और वध

जब पांडवों ने इंद्रप्रस्थ में राजसूय यज्ञ किया, तो यज्ञ में प्रथम पूज्य के रूप में श्रीकृष्ण का सम्मान किया गया। यह देखकर शिशुपाल ने सभा में श्रीकृष्ण का अपमान करना शुरू कर दिया। उसने बार-बार कटु वचन कहे और अपनी मर्यादा भूल गया।

श्रीकृष्ण ने उसके सौ अपराध क्षमा किए, परंतु सीमा पार होने पर उन्होंने अपना सुदर्शन चक्र चलाया और सभा में ही शिशुपाल का वध कर दिया। कहते हैं कि उसके शरीर से निकला तेज श्रीकृष्ण में ही विलीन हो गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि उसे मोक्ष प्राप्त हुआ।

निष्कर्ष

शिशुपाल का चरित्र हमें यह शिक्षा देता है कि अहंकार और द्वेष अंततः विनाश का कारण बनते हैं। साथ ही, यह कथा भगवान श्रीकृष्ण की धैर्यशीलता और धर्म की स्थापना का भी प्रतीक है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग पर एक हिन्दी लेख

  घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग पर हिन्दी लेख  प्रस्तावना भारत की पावन भूमि पर स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग का विशेष स्थान ...