यहाँ स्कंद माता (Skand Mata) के बारे में एक संक्षिप्त और जानकारीपूर्ण हिंदी लेख चित्रों (images) के साथ है —





स्कंद माता — परिचय
स्कंद माता हिन्दू धर्म में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में से पाँचवें स्वरूप को कहा जाता है।
स्कंद माता का नाम “स्कंद” नामक देवता के कारण पड़ा, क्योंकि वे स्कंद (भगवान कार्तिकेय) की माता हैं। इसलिए इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। (Bhaskar)
देवी स्वरूप और रूप-रेखा
माँ चार भुजाओं वाली देवी हैं।
एक भुजा अभय मुद्रा में है और दूसरी में lotus (कमल) पकड़ी होती है।
माँ अपने गोद में बाल रूप में भगवान स्कंद/कार्तिकेय को धारण किए बैठी हैं।
माँ का वाहन सिंह (शेर) है। (Webdunia)
पूजा-अर्चना समय
माँ स्कंद माता की पूजा नवरात्रि के पांचवें दिन की जाती है।
यह दिन माँ की ममता और शक्ति का प्रतीक होता है। (Navbharat Times)
पौराणिक कथा (संक्षेप)
देवताओं के अनुसार असुरों का अत्यधिक आतंक था और विघ्नों को हराने के लिए माँ पार्वती ने स्कंद/कार्तिकेय को जन्म दिया। इसी कारण यह रूप की उपासना की जाती है। (hindunidhi.com)
मंत्र और महत्व
स्कंद माता के आराधना से ध्यान, शक्ति, समृद्धि और मानसिक एकाग्रता प्राप्त होती है। पूजा के दौरान विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है जैसे —
“सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया…” (Bhaskar)
पुष्ट बात
स्कंद माता मां दुर्गा की ही शक्ति का रूप हैं।
नवरात्रि में हर देवी के अलग-अलग गुण और शिक्षा होते हैं, और स्कंद माता ममता, शक्ति और बोध का प्रतिनिधित्व करती हैं। (Bhaskar)
अगर चाहें तो मैं स्कंद माता की विस्तृत पूजा विधि (पूजा चारण, मंत्र, आरती) अलग से भी हिंदी में तैयार कर सकता हूँ — बस बताइए! 😊
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