श्रुतिमान पर एक हिन्दी लेख
प्रस्तावना
हनुमान भारतीय संस्कृति और धर्म में शक्ति, बुद्धि, भक्ति और सेवा के अद्भुत प्रतीक माने जाते हैं। उनके अनेक नाम हैं, और प्रत्येक नाम उनके किसी विशेष गुण को प्रकट करता है। उन्हीं नामों में से एक नाम “श्रुतिमान” भी है। “श्रुतिमान” शब्द का अर्थ है – जो वेदों और ज्ञान को सुनकर समझने वाला, विद्वान तथा गहन ज्ञान का धनी हो।
हनुमान जी को श्रुतिमान इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे केवल बलवान ही नहीं बल्कि अत्यंत विद्वान भी थे। उन्होंने शास्त्र, वेद और नीति का गहरा अध्ययन किया था। उनका ज्ञान इतना व्यापक था कि देवता और ऋषि भी उनकी बुद्धि की प्रशंसा करते थे।
हनुमान का ज्ञान और श्रुतिमान नाम का अर्थ
“श्रुति” का अर्थ है वेद या दिव्य ज्ञान और “मान” का अर्थ है धारण करने वाला। इसलिए “श्रुतिमान” का अर्थ हुआ – वेदों और दिव्य ज्ञान को धारण करने वाला।
रामायण में वर्णन मिलता है कि हनुमान जी केवल पराक्रमी योद्धा ही नहीं थे, बल्कि वे अत्यंत ज्ञानी और बुद्धिमान भी थे। उन्होंने वेद, व्याकरण, नीति और धर्मशास्त्र का अध्ययन किया था। यही कारण है कि उन्हें ज्ञान और विवेक का प्रतीक माना जाता है।
जब भी भगवान के कार्यों में निर्णय लेने की आवश्यकता होती थी, तब उनकी बुद्धि और ज्ञान सबसे आगे रहते थे। इसीलिए उन्हें “श्रुतिमान” कहा गया।
हनुमान का शिक्षा ग्रहण
सूर्यदेव को हनुमान जी का गुरु माना जाता है। कथा के अनुसार बाल्यकाल में हनुमान जी ने सूर्यदेव से शिक्षा प्राप्त करने का निश्चय किया। सूर्यदेव निरंतर आकाश में चलते रहते थे, इसलिए उन्होंने कहा कि वे स्थिर नहीं रह सकते।
लेकिन हनुमान जी ने अद्भुत संकल्प दिखाया। वे सूर्य के सामने उड़ते हुए चलते रहे और उनसे वेद, व्याकरण और शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया। इस प्रकार उन्होंने निरंतर प्रयास से सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया।
इस घटना से स्पष्ट होता है कि हनुमान जी केवल शक्तिशाली ही नहीं बल्कि अत्यंत जिज्ञासु और विद्वान भी थे।
रामायण में श्रुतिमान हनुमान
राम के प्रति हनुमान जी की भक्ति जगत में प्रसिद्ध है। लेकिन उनकी बुद्धिमत्ता भी उतनी ही महान थी।
जब हनुमान जी पहली बार राम और लक्ष्मण से मिले, तब उन्होंने अत्यंत मधुर और शुद्ध संस्कृत में संवाद किया। उनकी वाणी सुनकर राम बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने कहा कि इतनी शुद्ध भाषा केवल वही बोल सकता है जिसने वेद और व्याकरण का गहन अध्ययन किया हो।
यही घटना यह सिद्ध करती है कि हनुमान वास्तव में “श्रुतिमान” थे – अर्थात ज्ञान और विद्या के भंडार।
लंका में बुद्धिमत्ता का परिचय
जब सीता की खोज में हनुमान जी लंका पहुँचे, तब उन्होंने केवल बल का ही प्रयोग नहीं किया बल्कि अपनी बुद्धि का भी प्रयोग किया।
सीता की खोज के दौरान उन्होंने सावधानी और धैर्य से कार्य किया। वे छोटे रूप में लंका में प्रवेश कर गए ताकि कोई उन्हें पहचान न सके।
जब उन्हें सीता माता मिलीं, तब उन्होंने अत्यंत विनम्र और बुद्धिमान शब्दों में उनसे बात की। उन्होंने पहले राम की अंगूठी दिखाई ताकि सीता को विश्वास हो जाए कि वे राम के दूत हैं।
यह घटना दिखाती है कि हनुमान जी केवल बलवान ही नहीं बल्कि अत्यंत विवेकशील और ज्ञानवान भी थे।
श्रुतिमान हनुमान का आध्यात्मिक महत्व
हनुमान जी का “श्रुतिमान” रूप हमें यह सिखाता है कि जीवन में केवल शक्ति ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि ज्ञान और विवेक भी आवश्यक होते हैं।
उनका जीवन यह संदेश देता है कि –
ज्ञान से ही सही निर्णय लिया जा सकता है।
विनम्रता और भक्ति से ज्ञान का उपयोग सही दिशा में होता है।
विद्या और शक्ति का संतुलन ही सच्ची महानता है।
इस कारण से भक्त हनुमान जी को केवल शक्ति के देवता नहीं बल्कि ज्ञान और बुद्धि के देवता भी मानते हैं।
हनुमान चालीसा में ज्ञान की महिमा
हनुमान चालीसा में भी हनुमान जी के ज्ञान की प्रशंसा की गई है। तुलसीदास जी ने लिखा है –
“जय हनुमान ज्ञान गुण सागर,
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।”
इस पंक्ति में हनुमान जी को ज्ञान और गुणों का सागर कहा गया है। यह वर्णन उनके “श्रुतिमान” स्वरूप को ही दर्शाता है।
आधुनिक जीवन में श्रुतिमान हनुमान से प्रेरणा
आज के समय में भी हनुमान जी का श्रुतिमान रूप हमें कई महत्वपूर्ण सीख देता है –
ज्ञान का महत्व – जीवन में सफलता के लिए शिक्षा और ज्ञान आवश्यक है।
विनम्रता – अधिक ज्ञान होने पर भी अहंकार नहीं करना चाहिए।
सेवा भाव – ज्ञान का उपयोग समाज और धर्म के कल्याण के लिए करना चाहिए।
एकाग्रता और परिश्रम – निरंतर प्रयास से कोई भी विद्या प्राप्त की जा सकती है।
निष्कर्ष
“श्रुतिमान” हनुमान का एक ऐसा नाम है जो उनके ज्ञान, बुद्धि और विद्वत्ता को दर्शाता है। वे केवल बल और पराक्रम के देवता नहीं बल्कि वेदों के ज्ञाता, नीति के आचार्य और धर्म के रक्षक भी हैं।
उनका जीवन यह सिखाता है कि शक्ति और ज्ञान का संतुलन ही सच्ची महानता है। भक्ति, सेवा और विद्या से युक्त जीवन ही आदर्श जीवन होता है।
इसलिए हनुमान जी को “श्रुतिमान” कहकर उनकी विद्वत्ता और ज्ञान की महिमा का सम्मान किया जाता है।
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